Friday, September 12, 2014

याद - ए - केदारनाथ

डिस्कवरी चैनल पर उत्तराख़ंड चारधाम हादसे पर हुये एक एपिसोड को देखते हुये मुझे वो लम्हा याद आ गया जब मैं अपने परिवार के साथ केदारनाथ यात्रा पर था ।हरिद्वार से एक प्राईवेट टैक्सी में सवार होकर हम निकल पड़े चारधाम यात्रा पर जिसमें हमारे सारथी रहे मामा...हम उन्हे इसी नाम से जानते थे । सुहाना मौसम,प्रकृति का अद्भुत सौन्दर्य जिसका विवरण केवल वही आंखे बयाँ कर सकती है जिन्होने ये नज़ारा अपनी नज़रों में क़ैद किया हो । 
केदारनाथ यात्रा के प्रारंभ स्थल गौरी कुंड से महज़ 9 कि.मी. की दूरी में पहाड़ों की गोद में बसे गाँव रामपुर में हमने रूकने का फैसला लिया था ।उन दिनों भी बारिश का मौसम अपने शबाब में था लिहाज़ा रास्तों पर पहाड़ों से गिरते पत्थर और  गहरी खाई में हादसे का शिकार हुई गाड़ियों का कबाड़ हमारे अंदर यात्रा का रोमांच और डर दोनों जगा चुके थे । गौरीकुंड के गर्म पानी में शुद्धता स्नान के बाद हमारी यात्रा खच्चरों पर सवार होकर शुरू हुई । रामपुर के ही रहने वाले एक महज़ 22-23 साल के लड़के शिवा ने हमारे लिये खच्चरों का बंदोबस्त किया था । 
गौरीकुंड से श्री केदारनाथ के मध्य 14 कि.मी. की यात्रा के बीच एक पड़ाव था रामबाड़ा । ये वही स्थान है जहां जून 2013 में हुये हादसे के बाद ये छोटा सा समूचा शहर बाढ़ के पानी में समा गया था । डिस्कवरी चैनल पर ये कार्यक्रम देखने के दौरान मुझे खच्चर वाले शिवा सहित वो सारे लोग याद आ गये जिनसे हमारी रामबाड़ा में मुलाक़ात हुई थी ।एक झोपड़ी नुमा होटल में हमें गरमा-गरम आलू के पराठे परोसने वाला छोटू,हमारे खच्चरों को गुड़ चना खिलाने वाला वो अनाम व्यक्ति जिनसे अचानक ही एक ऐसा रिश्ता जुड़ गया था जो अनजान जगह पर अपनेपन की एक अनोखी दास्तान की तरह था । पर उस हादसे में रामबाड़ा पूरी तरह नेस्तोनाबूत हो गया।
कहते हैं वहां कोई नहीं बचा। ईश्वर से बस यही प्रार्थना है कि शिवा सहित वो तमाम लोग जिनकी वजह से हम केदारनाथ यात्रा पूरी कर पाये वो स्वस्थ्य हों और यदि आपने उन्हे अपने पास बुला लिया हो तो उनसे कहना कि प्रकृति के इस अप्रीतिम खूबसूरती का नज़ारा हमें कराने के लिये शुक्रिया आपका ।
ज्योतिर्लिंगो में विराजमान ईश्वरीय शक्तियों से बस यही ईल्तेजा है कि मैं दोबारा उसी स्थान पर आना चाहता हूं बस मेरी एक मासूम सी शर्त है कि मुझे फिर एक बार हमारी यात्रा के सारथी रहे हरिद्वार के मामा,रामपुर के शिवा और लज़्ज़तदार आलू के पराठे खिलाने वाले छोटू सहित मेरा पहले की तरह खूबसूरती से बसा रामबाड़ा वैसे ही वापस कर दिया जाये जैसा हम कभी उसे छोड़ के आये थे  । उम्मीद है आप मेरी यह दुआ ज़रूर क़बूल करेंगे । आमीन ॥ 

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