Tuesday, October 8, 2013

मासूम के साथ कुकर्म : हद हैवानियत की..........

घटना के बाद गुस्साई लोगों की भीड़ 
महिलाओं के लिये सख़्त से सख़्त क़ानून बनने के बावजूद पूरे देश में बलात्कार जैसे अपराध बढते ही जा रहें हैं । इसमें किसी प्रकार का अंकुश लगता नजर नही आ रहा है । बलात्कार जैसे घृणित मामलों से मानवता प्रतिदिन शर्मसार होती जा रही हैं । बीते रविवार की रात छत्तीसगढ़ के संस्कारधानी कहे जाने वाले शहर राजनांदगांव 
आरोपी विक्रम उर्फ विक्की 

में वार्ड नं.11 के सोलह खोली  इलाके में एक 24 वर्षीय युवक द्वारा मोहल्ले की तीन वर्षीय बच्ची के साथ किये गये बलात्कार की घटना के प्रति जनमानस में रोष बढ़ता ही जा रहा है  ।आरोपी व्यक्ति को पुलिस द्वारा तत्परता दिखाते हुये घटना के थोड़ी देर बाद ही अपनी गिरफ्त में भले ही ले लिया हो पर इस जघन्य कुकर्म की घटना ने ईलाके में होने वाली पुलिसिया गश्त पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है और मामले के आरोपी को त्वरित रूप से कड़ी से कड़ी सज़ा देने की मांग की जा रही है ।
आरोपी बच्ची का क़रीबी रिश्तेदार
ग़ौरतलब है कि  महज़ तीन साल की उम्र की बालिका के साथ बलात्कार की ख़बर ने पूरे शहर को हिला दिया है  । बलात्कार के आरोपी विक्रम उर्फ विक्की पिता गणेश जेदिया के बारे में बताया जा रहा हैं कि बच्ची के साथ कुकर्म करने वाला कोई और नही बल्कि पीडि़ता का क़रीबी रिश्तेदार ही है जो पेशे से मछली पकड़ने का काम करता है । रविवार की  रात 10 बजे जब घर पर बच्ची अपने चाचा के साथ थी उसी समय आरोपी विक्की पीडिता के घर पहॅूचा और बच्ची को चॉकलेट दिलवाने के नाम से घर के बाहर ले गया । मौहल्ले से दूर तालाब के किनारे ले जाकर आरोपी विक्की ने उस मासूम की मासूमियत को बेरहमी से रौन्द दिया । और बच्ची को उसी हालत में छोड़कर भाग निकला । बच्ची के  माता-पिता और मौहल्ले के लोगों ने काफी देर तक बच्ची को नदारत देखकर उसकी खोजबीन की तो उन्हें जानकारी मिली को बच्ची को अपने साथ लेकर गया आरोपी विक्की स्थानीय गौरीनगर तालाब के पास अकेला देखा गया है इसी बीच परिजनों की सूचना पर पुलिस की टीम भी मौके पर पहुंच गयी ।आरोपी के संबंध में जानकारी मिलते ही थाना प्रभारी अर्चना धुरंदर की अगुवाई में पुलिस की टीम ने विक्रम उर्फ विक्की की तलाश शुरू कर दी ।इसी बीच आरोपी के महादेव नगर में देखे जाने की सूचना पर पुलिस ने तत्काल वहां पहुंच कर आरोपी को अपनी गिरफ्त में लिया और थाने लेजा कर  कड़ाई से पूछताछ की ।
पुलिसिया मार के डर से उगला राज़ 
पुलिस की मार के डर से आरोपी ने सारी सच्चाई उगल दी और् बताया कि बच्ची गौरी नगर तालाब की पचरी के पास है  । पुलिस द्वारा बच्ची के परिजनो के साथ मिलकर उसे फौरन जिला अस्पताल लाया गया । जहां जिला अस्पताल के डॉ.विमल खूंटे तथा सी.एस. डॉ.मुन्ना मोहोबे  द्वारा बलात्कार की पुष्टि की गई ।  बताया जा रहा हैं कि आरोपी विक्की मोहल्ले में ही रहता हैं और बलात्कार की शिकार बच्ची के घर उसका लगभग रोज घर आना-जाना लगा रहता था । बच्ची की हालत नाजुक होता देख बच्ची को रायपुर के मेकाहारा चिकित्सालय रिफर  में रिफर कर दिया गया । जहां पर भी बच्ची सहित परिजनों को अव्यवस्था का शिकार होना पड़ा और काफी देर की मशक्कत के बाद कुकर्म की शिकार बच्ची का ईलाज शुरू किया गया ।
  
आरोपी को जनता के आक्रोश से बचाये रखा पुलिस ने


डॉक्टरों की जांच रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि होते ही आरोपी विक्रम के प्रति जनता के रोष को देखते हुये उसे कोतवाली थाना से चिखली थाना शिफ्ट कर दिया और थाने जमा भीड़ को जैसे-तैसे शांत किया ।जनता द्वारा बार-बार आरोपी को उनके समक्ष एक बार प्रस्तुत कर देने की मांग की जाती रही पर मामले की गंभीरता को देखते हुये पुलिस प्रशासन स्थिति को संभालने में जुटा रहा । वारदात के दूसरे दिन तड़के ही पुलिस ने आरोपी को लालबाग थाना शिफ्ट कर दिया जहां से उसे न्यायालय के समक्ष पेश कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजी दिया गया । आरोपी के खिलाफ धारा 363,376,307 सहित लैंगिक अपराधों से संबंधित बाल संरक्षण अधिनियम 2012 की धारा 4 (पॉक्सो)लगायी गयी है । 

Wednesday, August 21, 2013

ग़ज़ब ढायो "कांदा" जुलम भयो रे.......

शुरूवात मौजूदा दौर के भविष्य के एक फिल्मी डॉयलाग से....जहां एक लड़की सार्वजनिक रूप से छेड़छाड़ का शिकार होने पर कुछ इस तरह की बद्दुआयें दे रही है..." जा कमीने जा...भगवान तूझे तेरी इस ज़लील हरक़त के लिये कान्दे के एक-एक छिलके के लिये तरसाये....तुझे रसभरे प्याज़ का ईक टुकड़ा तक नसीब ना हो..."या फिर एक माँ अपने बच्चे से कह रही हो..." सो जा बेटे सो जा...वरना गब्बर घर की सारी प्याज़ उठा कर ले जायेगा..." ।
 वल्लाह क्या कोहराम मचा हुआ है महज़ एक कान्दे (प्याज़) के नाम पर....विपक्षी पार्टियां सरकार पर तोहमत पर तोहमत लगाये जा रही हैं....ईल्ज़ामों का दौर अपने शबाब पर है और इस देश का सबसे बिचारा कहलाने का दर्जा पाने वाले मध्यम वर्गीय परिवार के किचन से प्याज़ लगभग नदारत सा हो चला है....ख़ैर क्यों ना हो..?? 80 रूपये किलो में तो सरकार की अनुकम्पा से 80 किलो चावल का जुगाड़ किया जा सकता है तो फिर कांदे की परवाह काहे की जाये भई....?भारत के सर्वाधिक प्याज़ उत्पादक क्षेत्र नासिक में मौसम की मार झेल रहे किसानों की फसल पर आफत के परकाले गिर आये लिहाज़ा प्याज़ की कीमतों में बेतहाशा उछाल एक जायज़ प्रतिक्रिया थी....मुझे ईल्म है कि एन.डी.ए. सरकार के कार्यकाल के दौरान भी एक बार प्याज़ के दामों में इसी तरह बिजली गिरी थी...मसलन यह साफ है कि सरकार भले चाहे किसी की भी हो ये मुई महंगाई कम होने का नाम ही नहीं ले रही है...। साहेबान ये हालात हमें भविष्य की भयावह तस्वीर की ख़ौफनाक झलकियां दिखला रहे हैं....अगर आप आंकड़ो पर विश्वास रखते हैं तो इस ज़मीनी हक़ीक़त को मान लिजिये कि महंगाई की यह आफत अगर 25% आसमानी बला से उपजी है तो 75 फीसदी जनता को सौगात के तौर पर दी जाने वाली मुफ़्तखोरी से उपजी है ।
मैं छत्तीसगढ़ की माटी की देन हूं लिहाज़ा मै अपने ही राज्य के बारे में कहना चाहूंगा की मौजूदा सरकार इन दिनों सस्ता अनाज बांट-बांट कर उकता चुकी है सो नया पैंतरा ईस्तेमाल किया जा रहा है...सायकल/सिलाई मशीन/चप्पल/गाय/बैल और ना जाने क्या-क्या बेतहाशा बांटे जा रहे हैं....ट्रकों और मेटाडोरों में लाद कर लायी गयी जनता को जगह-जगह सभाये कर पैदल यात्रा/चप्पल यात्रा/जूता यात्रा/कपड़ा यात्रा बनाम यात्राओं के नाम पर बुला-बुला कर वस्तुओं का बंटवारा किया जा रहा है....तो जनाब कहने का मक़सद यह है की गोया यह सब चीज़ें आख़िरकार आती कहां से हैं...???ज़ाहिर सी बात है कि बांटने के लिये ईन्हें खरीदना भी पड़ता होगा....जिसके लिये पैसों की भी दरकार होती होगी....और सरकार के पास पैसा कहां से आता है यह बताने की ज़रूरत कम से कम इस प्लेटफार्म में तो हरग़िज़ नहीं है....सरकारी बजट हमेशा घाटे का भोंपू बजाता है कि फलाने क्षेत्र में इतने का घाटा हुआ...ढेकाने क्षेत्र में इतने का घाटा हुआ तो मांई-बाप ये मुफ़्तखोरी की रक़म क्या आप अपने ससुराल से लाते हैं जो चना-मुर्रे की तरह आम किये हुये हैं....??? अदना से कांदे की कीमत में उछाल हुआ, लगे सरकार को कोसने....पैट्रोल-डीज़ल के भाव बढ़े, लगे सरकार की फजीहत करने...किसी को कोसने-काटने से बेहतर है अपनी आदत में सुधार लाना....स्व.श्रीराम शर्मा जी ने भी कहा था कि हम बदलेंगे तो युग बदलेगा...पर ये चंद लोग हैं जो बदलने का नाम तो दूर बदलाव को मटिया-मेट करनें में तुले हुये हैं....ईधर रस्साला भारतीय रूपया रसातल में जाने को आतुर है वहां ये कांदा दिमाग का दही करने में तुला हुआ है । कभी-कभी तो लगता है कि सरकार से आर.टी.आई. के तहत पूछ ही लूं कि इन सब मुफ़्तखोरियों में कितनी रक़म का सत्यानाश किया है...पर घर-परिवार वाला हूं...घबरा जाता हूं क्योंकि छ.ग. में वर्ष 2012 को इंदिरा गांधी कृषि वि.वि. में हुये एक कार्यक्रम के दौरान एक शख़्स अनवर हुसैन ने सीधा प्रदेश के मुखिया को कह दिया था कि सरकार धान की उत्पादकता के जो आंकड़े बता रही है वो सरासर ग़लत है....फिर क्या बिचारे को जेल की हवा खानी पड़ी....परिवार को फजीलत अलग सहनी पड़ी...।
सत्ता के पावर के क्या कहने भई अच्छे-अच्छे तीस मार ख़ांन निपटा दिये जाते हैं फिर हमारी क्या बिसात....किचन से खाना बनाने वाली दीदी आवाज़ दे रही है..."भैय्या प्याज़ ख़त्म हो गयी है...लेकर आओ.."लिहाज़ा हम चुपचाप कांदे के कटने से पहले आँसू बहाते हुये प्याज़ लेने के लिये रवानगी भरते हैं....कमबख़्त एफ.एम.चैनल भी मुंह चिढ़ाता हुआ गीत सुना रहा है...जिसके बोल हैं "आमदनी अठन्नी..ख़र्चा रूपईय्या..........................॥ 



Tuesday, March 5, 2013

अल्पसंख्यक ग़रीब


मेरे एक मित्र जो की वारंगल आन्ध्र प्रदेश में रहते हैं..पेशे से किसान हैं...कल रात उनका फोन आया...
जनाब बड़े परेशान लग रहे थे....मैनें कहा मियां क्या बात है..?आख़िर इस परेशानी का सबब तो बतलाओ...
जब्बन मियां हैदराबादी ज़बान में तपाक से बोले....ये तुमईच लोगों की क़ारस्तानी हैं मियां जिसने हमें ग़फलत में डाल रखा है....
ले-दे के 11 एकड़ की ख़ेतीईच बाक़ी है उस पर भी हल चलाने वाले ग़ायब है मियां.....॥
 मुआमला मुझे ज़रा गंभीर लगा...मैनें कहा जब्बन मियां आपके यहां तो मज़दूर आसानी से मिल जाते हैं....आख़िर कौन सी बात हो गयी जो हालात इस क़दर बदतर हो गये...??
 जब्बन मियां बोले ये मज़दूरां मेरे को कहते हैं की पड़ौसी मुलुक (उनके मुताबिक़ हमारा राज्य) में बिटिया ब्याही है..हमारे दामाद भी उने खेतों में मजदूरी करते हैं...उने कई-कई दिन काम में नई जाते हैं फिर भी उने राशन-पानी की कोई कमी नई होती...उने की सरकार रूपया-दो रूपया में खाने को चावल चना उनके घरों तक पहुंचा जाती है...तुम हमें क्या देते हो मियां....इससे अच्छा है हम भी वहीं की रवानगी भर लें....
जब्बन मियां ने तो अपने दिल के फोड़े फोड़ लिये पर मौजुदा हालात का मवाद मेरे लैपटॉप के की बोर्ड पर बहा चला आया...यक़ीनन क्या इस राज्य में ग़रीब होना भी एक तरह का वरदान है..??
 खाने को सस्ता चावल/चना सरकार की नमक हलाली के लिये मुफ्त का नमक.....और बूढ़े-बुज़ुर्गों के लिये अब फ्री की तीर्थ यात्रा....
हे मेरी अति संवेदनशील सरकार...कुछ ध्यान ज़रा हम अल्प संख्यक गरीबों पर भी डालो.....महंगा चावल...महंगी दाल..महंगा तेल और 25 रूपये का टाटा नमक खाते-खरीदते जान आफत में आ गयी है...
और आपकी की इस दरियादिली का ख़ामियाजा गाहे-बिगाहे हमें ही उठाना पड़ता है, पल-पल बढ़ती महंगाई को गले लगाकर....वैसे पड़ौसी राज्यों के मजदूर भी आजकल एक नारा पुरज़ोर बुलंद कर रहे हैं जो कहता है "मैं आवत हवव फोकट के भात खाये बर"