Thursday, March 29, 2012

मौत का राज़-फाश

मृतक रिंकू

छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव ज़िले का एक छोटा सा गाँव गर्रा जहां तरक्की के इस दौर में भी गाँव वालों ने आपसी रज़ामन्दी से एक ऐसा फैसला ले लिया जिससे पूरे ईलाके में दहशत का माहौल हो गया ।घटना से जुड़े मामलों की भनक गाँव वालों ने किसी को लगने नहीं दी पर जब राज़ फाश हुआ तो पुलिस महकमे सहित लोगों में सनसनी  फैल गयी ।
मृतिका नीलम्
प्रदेश के मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र राजनांदगाँव ज़िले के छुईखदान थाना क्षेत्र में आने वाले गाँव गर्रा में ज़बरदस्ती शादी किये जाने से बचने के लिये एक प्रेमी जोड़े की आत्महत्या करने का सनसनीखेज मामला सामना आया है।गाँव वालों ने इस मामले में अजीब तरह की चुप्पी साध रखी है। गाँव का कोई भी निवासी ग्राम पंचायत के पंच,कोटवार सब खामोश हैं।
मृतक को इसी स्थान पर जलाया गया
कोई भी प्रेमी जोड़े के बारे में कुछ नहीं बोलना चाहता है।बीती 21 मार्च की रात से गायब गाँव के 23 साल के घनश्याम उर्फ रिंकू और 20 साल की नीलम के बीच मोहब्बत परवान चढ़ चुकी थी।दोनों ने साथ मिलकर जीने मरने की कस्में खा ली थीं पर दोनों के परिवार वाले इस बात पर उनसे बेहद नाराज़ थे और दोनों की अलग-अलग जगह शादी करवाने की कोशिशें भी जारी थी।पर 21 मार्च की रात दोनों नें अपनी मोहब्बत को एक खतरनाक अंजाम देने का फैसला ले लिया और दोनों ने गाँव के ही एक कोठार में ज़हर खा कर अपनी जान दे दी।
इसी नाले में बहा दी गयी दोनों की अस्थियां
 गाँव वालों को जब उनके घर मे ना होने की बात पता चली तो हड़कम्प मच गया और दोनों की पतासाजी करने पर दोनों को एक कोठार मे मरा पाया गया। प्रेमी जोड़ो की लाश देखकर पूरा गाँव सकते में आ गया और सब ने बदनामी से बचने के लिये दोनों की लाश एक ही रात में जलाकर मामले को रफा-दफा कर दिया। घटना स्थल से सारे जरूरी सबूत भी मिटा दिये गये यहां तक की दोनों की चिताओं की राख को भी पास में बहते एक नाले में डाल कर सारे सबूत मिटाने की कोशिश की गयी। एक तरफ तो हम 21 वीं सदी में होने का दावा करते हैं और दूसरी तरफ इस तरह की घटनायें तरक्की के माथे पर कलंक साबित हो रही हैं......॥

Sunday, March 11, 2012

दास्तान बिखरे फूलों की......

पुष्प की अभिलाषा आपने बेशक सुनी होगी..जिनके अंदर मातृभूमि पर सर्वत्र न्यौछावर कर देने वाले वीरों के पग पर बिछ जाने की मंगल भावना कूट-कूट कर भरी हुई होती है...पर यही फूल जब किसी राजशाही या सीधे-सीधे लफ्ज़ों में कह लिजिये सरकारी आयोजन की शोभा बनते हैं तब उनके हालात बदतरी की मिसाल होते हैं...छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुखिया अर्थात माननीय मुख्यमंत्री साहब ने 11 मार्च 2012 को अपने विधायकी क्षेत्र तथा प्रदेश की कथित संस्कारधानी नगरी राजनांदगाँव में होली मिलन समारोह का वृहद आयोजन रखा...ज़ाहिर तौर पर जिस आयोजन का सरमायी मुख्यमंत्री साहब ख़ुद हों उसकी चमक-चाँदनी की आप कल्पना बेहतर कर सकते हैं....एक पत्रकार होने के नाते मुझे भी उस आयोजन का निमंत्रण पत्र प्राप्त हुया वो भी बाक़ायदा तीन-तीन...पहला श्रीमान जनसंपर्क अधिकारी ने भेजा दूसरा युवा मोर्चा के कर्मठ कार्यकर्ताओं ने और तीसरा महिला भाजपा कार्यकर्ताओं ने....
हमने भी कुछ साथियों के साथ सी.एम.साहब के नये नवेले चमचमाते हुये बंगले की तरफ रूख़ किया....पुलिस की चाक चौबंद व्यवस्था....जगह-जगह बैरीक्रेट्स के कारण यातायात व्यवस्था की सरेआम उड़ती धज्जियों के बीच होली मिलन समारोह बनाम सरकारी आम लंगर के नाम पर किराये की ऑटो/ट्रको/बसों में लाद कर लाई गयी जनता की धक्का-मुक्की खाते हुये हम आयोजन स्थल के प्रवेश द्वार में पहुंच ही गये...समारोह का माहौल अपने पूरे शबाब में था...प्रवेश द्वार के पास ही पेमेंट प्राप्त कलाकारों का दल फाग की मस्ती बिखेर रहा था....एक से बढ़कर एक फाग गीत कान फोड़ू संगीत के साथ गाये जा रहे थे....कुछ सम्मानीय महिला नर्तक जबरदस्त तरीके से छत्तीसगढ़ी नृत्य का दर्शन करा रही थी....आँखो को थोड़ी देर विश्राम देने के बाद हम आगे की ओर बढ़ लिये जहां सी.एम.साहब जनता से शुभकामनायें ले रहे थे....सौ बाई सौ के उस आलीशान पंडाल में सरकार के सभी नुमाईन्दे/छुटभैईय्ये से बड़े भईय्ये नेता भरे पड़े थे...सी.एम. साहब स्थानीय सांसद के साथ निरंतर खड़े रहकर जनता का आशीर्वाद ग्रहण करने के साथ फोटो सेशन करवा रहे थे...तभी एक अनजाने पुलिस वाले ने हमे सी.एम.साहब के नज़दीक जाने से रोका...हमने उसे अपने प्रेस कार्ड का हल्का सा झलक दर्शन करा दिया...उसने भी बड़े सम्मान के साथ कहा आईये सर...मेरे पीछे मेरे तीन साथी भी पंडाल के अंदर हो लिये जिसे देखकर शहर कोतवाली के टी.आई. श्री विश्वास चन्द्राकर ने आकर मुझसे कहा की पुलिस वालो को खूब घुड़की देते हो भाई...मैनें कहा साहब आप तो सबको देते रहते हो कभी-कभी ले भी लिया करो...
बहरहाल अंदर का मुज़ायरा किसी शाही शादी के सरीके का था वहीं पास खड़े सहारा समय के पत्रकार साथी से किसी ने पूछा कि क्या होली मिलन है बॉस...उसने कहा की होली मिलन??हमें तो दिवाली नज़र आ रही है...साहेबानो पर फूलों की बरसात हो रही थी...कोई गुलाब बिखेर रहा था तो कोई गेन्दा...जिसकी जैसी हैसियत वैसे फूल....पैरों की नीचे फूल...सर के उपर फूल यदा-कदा सर्वत्र बिखरे फूल मैनें कहा हाय रे फूल...क्या है तेरा भाग्य? की कभी तू देश पर मर मिटने वालों के उपर चढ़ाया जाता है तो कभी मट्टी पलीद करने वालों के उपर....ज़ाहिर है की यह पुष्प की अभिलाषा हरगिज़ नहीं होगी पर क्या किया जा सकता है यह उसका नवीनतम भाग्य है जहां उसे अपने अस्तित्व पर कभी-कभार की अभिमान होता होगा...उस पंडाल के बाहर खूले मैदान पर शाही लंगर जारी था मुफ्त मे मिलने वाले शाही खाने पर टूट पड़ने वालों की कमी ना थी...पर लोगों को वहां खाने की प्लेटें भी नसीब नहीं थी...किसी ने दबी ज़ुबान से कहा कि खाना बनाया दो हज़ार लोगो के लिये और बुला लिया 10 हज़ार को...अब किसी को ख़ाक मिलेगा खाना...कुछ देर तक भोजन व्यवस्था का नज़ारा देखने के बाद हमें उस शख्स की बातों पर पूरा यक़ीन हो गया और हम वहां से कट लिये...लौटने के रास्ते पर बिखरे हुये फूल मायुसी से हमें और प्रदेश में चल रहे अतिक्रमण के नाम पर बेघर-बार हुये लोगों की तरफ देख रहे थे जो की साहब को ज्ञापन सौंपने आये थे...कानों मे माखनलाल चतुर्वेदी जी की कविता पुष्प की अभिलाषा गूंजायमान होती रही..और हमें फूलों की बेबसी पर नयी पोस्ट लिखने का ख्याल आया जो आप सभी के लिये हाज़िर है...॥