Saturday, June 30, 2012

मैं सिपाही अमजद ख़ान बोल रहा हूं....


शहीद अमज़द ख़ान (फोटो साभार-श्री राजू दिवान धमतरी)

जंगलपारा नगरी ज़िला धमतरी छत्तीसगढ़...यही है मेरी जन्मस्थली...जहाँ मेरी ज़िंदगी ने पहली साँसे ली थी...उस दिन बहुत खुश थे मेरे पिता कलीम ख़ान जो की वनोपज के एक निहायत ही छोटे दर्जे के व्यापारी हैं...बचपन से मुझे वर्दी का बड़ा शौक था..वर्दी पहने लोगों को देखकर मुझे मन ही मन गर्व महसूस होता था...मैनें अपने अब्बा से कह दिया था कि देखना एक ना एक दिन पुलिस वाला बन के ही दिखलाउंगा....खेलों में भी मेरी गहरी रूचि थी....और अल्लाह के फ़ज़लो क़रम से मैं पढ़ाई में भी आला दर्जे का था...एक दिन मेरी चाहत रंग लायी और मुझे 2006 में ज़िला पुलिस बल में आरक्षक के पद पर तैनाती मिल गयी...मुझे याद है की ट्रेनिंग के बाद मैनें बड़ी शान से अपनी क़लफदार वर्दी अपने अब्बा को दिखलायी थी जिसे देख कर उनकी आँखे भर आयी थी...मैनें पूरी शिद्दत के साथ अपनी नौकरी को अमली जामा पहनाया था...
इस बीच पूरे प्रदेश को छोटे-छोटे ज़िलों में बांटने की क़वायद शुरू हो गयी थी जिसके मद्देनज़र बस्तर के घने जंगलो के बीच बसे एक सुविधा विहीन ईलाके सुकमा को ज़िले का दर्ज़ा प्राप्त हो गया...मुझे क्या मालूम था की आगे चल कर सुकमा का ईलाक़ा ही मेरी कब्रगाह बनने वाला था...मुझे अतिउत्साही कलेक्टर एलेक्स पॉल मेनन का गार्ड बना कर सुकमा भेज दिया गया...नक्सली मामलों में सुकमा के एक बेहद संवेदनशील ईलाके होने की वजह से सुरक्षा की हर चेतावनी को नज़र अंदाज़ करते कलेक्टर मेनन बीहड़ ईलाकों में भी पहुंचने से गुरेज़ नहीं करते थे और उनका सुरक्षा गार्ड होने के नाते मैं हर वक़्त साये की तरह उनके साथ रहा करता था...मुझे क्या पता था की साहब की नाफरमानी एक दिन मुझे ही साये की शक़्ल लेने के लिये मजबूर कर देगी...
अप्रेल का महीना सन 2012 जिसके बाद मेरी ज़िंदगी की क़िताब के अक्षर हमेशा के लिये विराम लेने वाले थे...ग्राम सुराज का सरकारी ढोल पूरे प्रदेश में ज़ोरों से पीटा जा रहा था...नेता,प्रशासनिक अमला गाँव-गाँव पहुंच कर फायदेमंद सरकारी योजनाओं की जानकारी आम जनो को दे रहा था भले ही फायदा किन ख़ास लोगों तक पहुंचता है यह बात किसी से छुपी ना हो पर एक शासकीय कर्मी होने के नाते हमें ग्राम सुराज को सफल बनाने के लिये तत्परता से काम करना था...कलेक्टर साहब सुराज अभियान के लिये कमर कस तैय्यार थे....सुकमा का बीहड़ ईलाका जहां तमाम तरह की सुविधायें यथार्थ से कोसो दूर हैं...सड़क की परिकल्पना ही की जा सकती है...कई गाँव ऐसे मुहाने में बसे हैं जहाँ चार पहियों पर तो क्या दुपहिया भी बड़ी मशक़्क़त के बाद पहुंचा जा सकता है....पर 2006 बैच के आई.ए.एस. अधिकारी एलेक्स पॉल मेनन की सुरक्षा में तैनात मैं और मेरा एक और छत्तीसगढ़ के ही रायगढ़ निवासी साथी किशन कुजूर की प्रतिबद्धता थी साहब की पूर्ण सुरक्षा की....
21 अप्रेल 2012 दिन शनिवार की सुबह मैं जल्दी उठ गया....मेरे साथी किशन ने मेरे उठते साथ ही उजली धूप की मुस्कान की तरह गुड मार्निंग कहा...और हम कलेक्टर साहब के साथ ग्राम सुराज अभियान की भेंट चढ़ने के लिये निकल गये.....जैसा मैनें पहले ही कहा है कि साहब बड़े उत्साही क़िस्म के व्यक्ति हैं....काम के आगे वो कुछ और नहीं सोचते...यहां तक की नाश्ता और भोजन भी...ये बात अलहदा है कि उनके पास महंगा फूड सप्लीमेंट हमेशा मौजूद रहता था जिसे हम जैसे मिडिल क्लास लोगों के लिये ख़रीद पाना अमूमन नामुमकिन होता है.....साहब के साथ सुराज अभियान का जायज़ा लेते हुये पूरा दिन बीता और फिर वो लम्हा आ गया जब मैं और मेरा साथी किशन इस ईंसानी दुनिया को हमेशा के लिये छोड़ कर जाने वाले थे...
शाम करीब साढ़े 4 बजे केरलापाल के मांझीपारा में ग्राम सुराज शिविर लगा था… बताया गया कि पहले से कुछ नक्सली ग्रामीण वेशभूषा में वहां मौजूद थे.... कलेक्टर साहब शिविर में बैठे हुए थे तभी एक ग्रामीण वहां पहुंचा और मांझीपारा में किसी काम दिखाने की बात उन्हें कही... जिस पर साहब अपनी स्कार्पियों में कुछ ही दूर निकले थे तभी 10 से 15 मोटर साइकिल में सवार नक्सलियों ने उनके वाहन को घेर लिया और पूछा कलेक्टर कौन हैं...?? पास के ही पेड़ के पास अपनी बाईक पर बैठे-बैठे मेरे साथी किशन कुजूर ने अपनी गन तानी ही थी कि उस पर गोलियों की बौछार कर दी गयी और वह वहीं ढेर हो गया....मैनें एक पेड़ की आड़ लेकर अपनी गन से नक्सलियों पर फायरिंग शुरू कर दी और एक नक्सली को ढेर करने में क़ामयाब भी रहा...पर मैं अकेला और नक्सली अधिक...आख़िर मेरी अकेली गन कब तक उनका मुक़ाबला कर पाती...तभी अचानक लगा की बहुत सी लोहे की कीलें मेरे शरीर में चुभती चली जा रही हैं....और उस चुभन का दर्द बयाँ करना शायद मरने के बाद भी मुमकिन नहीं है...ख़ून से लत-पथ मैं ज़मीन पर आ गिरा....मेरी आँखे धीरे-धीरे बंद हो रही थी और उस आख़िरी वक़्त में भी मैं ख़ुदा को याद करने की बजाय अपनी गाड़ी में बैठे कलेक्टर साहब को देख रहा था और मन ही मन अफसोस कर रहा था की मैं उनकी सुरक्षा नहीं कर पाया.....और फिर मैनें एक हिचकी के साथ अपना शरीर ज़मीन के और जान अल्लाह के हवाले कर दिया....
मैं तो इस दुनिया से दूर चला गया..लेकिन उसके बाद साहब को नक्सलियों की क़ैद से आज़ाद कराने की संभवतः तयशुदा क़वायद शुरू कर दी गयी...समझौते के बहाने नक्सलियों के बुज़ुर्ग समर्थकों को राज्य अतिथि के दर्जे से नवाज़ा गया...आने-जाने के लिये हैलीकॉप्टर मुहैय्या कराया गया...हर जायज़ और नाजायज़ मांगो को माना गया....और कलेक्टर साहब की सुरक्षित रिहाई हो गयी...आसमानी हवाओं में ऊड़ते-ऊड़ते बात आयी की साहब की रिहाई में सरकारी पैसों का भी जमकर लेन-देन हुआ....ख़ैर मैं अब इन सब ईंसानी हरक़तों से परे हूं लेकिन मेरे बेवजह गुज़र जाने के बाद सरकारी मदद की राह तकते किशन और मेरे परिवार को देख मन भर आता है...दिल में रह-रह कर एक टीस सी उभरती है...पर आँखों से आँसू नहीं निकलते...यक़ीनन राजनीत की चौसर पर मोहरों की तरह बैठे लोगों की चाकरी करने से बेहतर है ख़ुदा का यह आरामगाह...जहाँ कुछ मतलब-परस्त लोगों की वजह से शहादत झेल रहे लोगों की कमी नहीं है...और वह सब भी बेहद ख़ुश हैं...अरे..अरे मेरे अब्बा हूज़ूर अपने पुराने रेडियो पर एक गाना सुनकर...मेरी याद में फफक-फफक कर रो रहे हैं....गाना भी माशा अल्लाह कमाल का है....ज़रा आप भी सुनिये...”मतलब की दुनिया को छोड़कर..प्यार की दुनिया में...ख़ुश रहना मेरे यार”........॥ 

Thursday, March 29, 2012

मौत का राज़-फाश

मृतक रिंकू

छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव ज़िले का एक छोटा सा गाँव गर्रा जहां तरक्की के इस दौर में भी गाँव वालों ने आपसी रज़ामन्दी से एक ऐसा फैसला ले लिया जिससे पूरे ईलाके में दहशत का माहौल हो गया ।घटना से जुड़े मामलों की भनक गाँव वालों ने किसी को लगने नहीं दी पर जब राज़ फाश हुआ तो पुलिस महकमे सहित लोगों में सनसनी  फैल गयी ।
मृतिका नीलम्
प्रदेश के मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र राजनांदगाँव ज़िले के छुईखदान थाना क्षेत्र में आने वाले गाँव गर्रा में ज़बरदस्ती शादी किये जाने से बचने के लिये एक प्रेमी जोड़े की आत्महत्या करने का सनसनीखेज मामला सामना आया है।गाँव वालों ने इस मामले में अजीब तरह की चुप्पी साध रखी है। गाँव का कोई भी निवासी ग्राम पंचायत के पंच,कोटवार सब खामोश हैं।
मृतक को इसी स्थान पर जलाया गया
कोई भी प्रेमी जोड़े के बारे में कुछ नहीं बोलना चाहता है।बीती 21 मार्च की रात से गायब गाँव के 23 साल के घनश्याम उर्फ रिंकू और 20 साल की नीलम के बीच मोहब्बत परवान चढ़ चुकी थी।दोनों ने साथ मिलकर जीने मरने की कस्में खा ली थीं पर दोनों के परिवार वाले इस बात पर उनसे बेहद नाराज़ थे और दोनों की अलग-अलग जगह शादी करवाने की कोशिशें भी जारी थी।पर 21 मार्च की रात दोनों नें अपनी मोहब्बत को एक खतरनाक अंजाम देने का फैसला ले लिया और दोनों ने गाँव के ही एक कोठार में ज़हर खा कर अपनी जान दे दी।
इसी नाले में बहा दी गयी दोनों की अस्थियां
 गाँव वालों को जब उनके घर मे ना होने की बात पता चली तो हड़कम्प मच गया और दोनों की पतासाजी करने पर दोनों को एक कोठार मे मरा पाया गया। प्रेमी जोड़ो की लाश देखकर पूरा गाँव सकते में आ गया और सब ने बदनामी से बचने के लिये दोनों की लाश एक ही रात में जलाकर मामले को रफा-दफा कर दिया। घटना स्थल से सारे जरूरी सबूत भी मिटा दिये गये यहां तक की दोनों की चिताओं की राख को भी पास में बहते एक नाले में डाल कर सारे सबूत मिटाने की कोशिश की गयी। एक तरफ तो हम 21 वीं सदी में होने का दावा करते हैं और दूसरी तरफ इस तरह की घटनायें तरक्की के माथे पर कलंक साबित हो रही हैं......॥

Sunday, March 11, 2012

दास्तान बिखरे फूलों की......

पुष्प की अभिलाषा आपने बेशक सुनी होगी..जिनके अंदर मातृभूमि पर सर्वत्र न्यौछावर कर देने वाले वीरों के पग पर बिछ जाने की मंगल भावना कूट-कूट कर भरी हुई होती है...पर यही फूल जब किसी राजशाही या सीधे-सीधे लफ्ज़ों में कह लिजिये सरकारी आयोजन की शोभा बनते हैं तब उनके हालात बदतरी की मिसाल होते हैं...छत्तीसगढ़ प्रदेश के मुखिया अर्थात माननीय मुख्यमंत्री साहब ने 11 मार्च 2012 को अपने विधायकी क्षेत्र तथा प्रदेश की कथित संस्कारधानी नगरी राजनांदगाँव में होली मिलन समारोह का वृहद आयोजन रखा...ज़ाहिर तौर पर जिस आयोजन का सरमायी मुख्यमंत्री साहब ख़ुद हों उसकी चमक-चाँदनी की आप कल्पना बेहतर कर सकते हैं....एक पत्रकार होने के नाते मुझे भी उस आयोजन का निमंत्रण पत्र प्राप्त हुया वो भी बाक़ायदा तीन-तीन...पहला श्रीमान जनसंपर्क अधिकारी ने भेजा दूसरा युवा मोर्चा के कर्मठ कार्यकर्ताओं ने और तीसरा महिला भाजपा कार्यकर्ताओं ने....
हमने भी कुछ साथियों के साथ सी.एम.साहब के नये नवेले चमचमाते हुये बंगले की तरफ रूख़ किया....पुलिस की चाक चौबंद व्यवस्था....जगह-जगह बैरीक्रेट्स के कारण यातायात व्यवस्था की सरेआम उड़ती धज्जियों के बीच होली मिलन समारोह बनाम सरकारी आम लंगर के नाम पर किराये की ऑटो/ट्रको/बसों में लाद कर लाई गयी जनता की धक्का-मुक्की खाते हुये हम आयोजन स्थल के प्रवेश द्वार में पहुंच ही गये...समारोह का माहौल अपने पूरे शबाब में था...प्रवेश द्वार के पास ही पेमेंट प्राप्त कलाकारों का दल फाग की मस्ती बिखेर रहा था....एक से बढ़कर एक फाग गीत कान फोड़ू संगीत के साथ गाये जा रहे थे....कुछ सम्मानीय महिला नर्तक जबरदस्त तरीके से छत्तीसगढ़ी नृत्य का दर्शन करा रही थी....आँखो को थोड़ी देर विश्राम देने के बाद हम आगे की ओर बढ़ लिये जहां सी.एम.साहब जनता से शुभकामनायें ले रहे थे....सौ बाई सौ के उस आलीशान पंडाल में सरकार के सभी नुमाईन्दे/छुटभैईय्ये से बड़े भईय्ये नेता भरे पड़े थे...सी.एम. साहब स्थानीय सांसद के साथ निरंतर खड़े रहकर जनता का आशीर्वाद ग्रहण करने के साथ फोटो सेशन करवा रहे थे...तभी एक अनजाने पुलिस वाले ने हमे सी.एम.साहब के नज़दीक जाने से रोका...हमने उसे अपने प्रेस कार्ड का हल्का सा झलक दर्शन करा दिया...उसने भी बड़े सम्मान के साथ कहा आईये सर...मेरे पीछे मेरे तीन साथी भी पंडाल के अंदर हो लिये जिसे देखकर शहर कोतवाली के टी.आई. श्री विश्वास चन्द्राकर ने आकर मुझसे कहा की पुलिस वालो को खूब घुड़की देते हो भाई...मैनें कहा साहब आप तो सबको देते रहते हो कभी-कभी ले भी लिया करो...
बहरहाल अंदर का मुज़ायरा किसी शाही शादी के सरीके का था वहीं पास खड़े सहारा समय के पत्रकार साथी से किसी ने पूछा कि क्या होली मिलन है बॉस...उसने कहा की होली मिलन??हमें तो दिवाली नज़र आ रही है...साहेबानो पर फूलों की बरसात हो रही थी...कोई गुलाब बिखेर रहा था तो कोई गेन्दा...जिसकी जैसी हैसियत वैसे फूल....पैरों की नीचे फूल...सर के उपर फूल यदा-कदा सर्वत्र बिखरे फूल मैनें कहा हाय रे फूल...क्या है तेरा भाग्य? की कभी तू देश पर मर मिटने वालों के उपर चढ़ाया जाता है तो कभी मट्टी पलीद करने वालों के उपर....ज़ाहिर है की यह पुष्प की अभिलाषा हरगिज़ नहीं होगी पर क्या किया जा सकता है यह उसका नवीनतम भाग्य है जहां उसे अपने अस्तित्व पर कभी-कभार की अभिमान होता होगा...उस पंडाल के बाहर खूले मैदान पर शाही लंगर जारी था मुफ्त मे मिलने वाले शाही खाने पर टूट पड़ने वालों की कमी ना थी...पर लोगों को वहां खाने की प्लेटें भी नसीब नहीं थी...किसी ने दबी ज़ुबान से कहा कि खाना बनाया दो हज़ार लोगो के लिये और बुला लिया 10 हज़ार को...अब किसी को ख़ाक मिलेगा खाना...कुछ देर तक भोजन व्यवस्था का नज़ारा देखने के बाद हमें उस शख्स की बातों पर पूरा यक़ीन हो गया और हम वहां से कट लिये...लौटने के रास्ते पर बिखरे हुये फूल मायुसी से हमें और प्रदेश में चल रहे अतिक्रमण के नाम पर बेघर-बार हुये लोगों की तरफ देख रहे थे जो की साहब को ज्ञापन सौंपने आये थे...कानों मे माखनलाल चतुर्वेदी जी की कविता पुष्प की अभिलाषा गूंजायमान होती रही..और हमें फूलों की बेबसी पर नयी पोस्ट लिखने का ख्याल आया जो आप सभी के लिये हाज़िर है...॥

Sunday, February 19, 2012

केरोसिन का स्याह कारोबार......

केरोसिन से भरा टैंकर

गौरतलब है कि सरकार अभी ईंधन और उर्वरकों पर करीब 74 हजार करोड़ रुपये की सब्सिडी हर साल दे रही है, लेकिन वित्त मंत्री के मुताबिक इसका बड़ा हिस्सा वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच ही नहीं पाता है। टास्क फोर्स ने केरोसिन के लिए दो चरणों में सब्सिडी ट्रांसफर की सिफारिश की है। वित्त मंत्री ने कहा कि डायरेक्ट सब्सिडी से इसका दुरुपयोग रोकने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि केरोसिन पर सब्सिडी सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में सुधार से जुड़ा है। केरोसिन पर सब्सिडी की सफलता राज्यों पर निर्भर करती है क्योंकि इसका वितरण राज्य सरकारों के जरिए ही किया जाएगा। बावजूद इस संपूर्ण क़वायद के छत्तीसगढ़ राज्य के मुखिया डॉ.रमन सिंह के विधानसभा क्षेत्र राजनांदगाँव ज़िले में कैरोसिन की कालाबाज़ारी का खुला खेल खेला जा रहा है। गरीबों के इस तेल के काले खेल के खिलाड़यों का सुरक्षित पनाहगार बने राजनांदगाँव ईलाके में गुज़रे कई महीनों से मिट्टी के तेल के अवैध कारोबारी चाँदी काट रहे हैं और प्रशासन रहस्यमयी मौन धारण किये बैठा है ।
केरोसिन के गिरफ्तार कालाबाज़ारी
शुक्रवार 17 फरवरी 2012 की मध्य रात्रि राजनांदगाँव पुलिस को मुखबीर के ज़रिये सूचना मिली की स्थानीय जी.ई.रोड स्थित रामदरबार मंदिर के पास संदीप सिंह नाम का एक शख्स जो मिट्टी तेल के अवैध कारोबार के मामले में नामचीन है ने आयकर भवन के सामने अपनी दुकान में भारी मात्रा में नीला केरोसिन रखा हुआ है तथा वहां खड़े एक टैंकर में भी मिट्टी के तेल का अवैध ज़खीरा भरा पड़ा है। सूचना के बाद कोतवाली पुलिस ने संदीप सिंह की दुकान पर छापामार कार्यवाही कर 24 हज़ार 400 लीटर मिट्टी का तेल बरामद किया। संदीप सिंह सहित तीन अपराधियों पर जुर्म दर्ज कर उन्हें शनिवार की सुबह पुलिसिया रिमांड पर भेज दिया गया पर उसके बाद जो हुआ वो समझ से परे था देर रात संदीप सिंह शहर में बेखौफ घूमता हुआ दिखायी दिया...इसका मतलब साफ था कि उसे जुर्म दर्ज होने के चंद घंटे के अंदर ही ज़मानत मिल गयी थी....उस वक़्त दिल में एक ख्याल पुख़्ता हो चला की इस देश में यदि आपकी गिनती रसूखदारों में आती है तो आपके लिये कुछ भी काम असंभव नहीं है...पर सवाल यह है की आख़िर कब तक गरीबों का रहनुमा होने का दावा करने वाले सरकारी दरख़्तों के साये में ज़रूरतमंद लोग लुटते जाते रहेंगे??ग़रीबी यक़ीनन तरक्की के इस युग में कोई विकराल समस्या नहीं है लेकिन इस समस्या को यथावत रखकर अमीर बनते जा रहे चतुर लोगों की बेशर्म चतुराई की उपज आज भी समाज के कुछ हिस्से को दरिद्रता के दावानल में झुलसते हुये देखना चाहती है ताकि वो उस पर राहत की बौछार करने के बहाने अपनी रोटी सेंक सके...मिट्टी तेल के कालाबाज़ारी संदीप सिंह जैसे लोग तो सिर्फ एक मिसाल की तरह हैं जो डंके की चोट पर यह बताना चाहते हैं की जब तक भ्रष्ट्राचार की चाशनी में डूबे हुक्मरानों का हाथ उनके सरों पर है तब तक वो समाज के सफेद चेहरे पर स्याह कालिख पोतने का काम जारी रखेंगे.....एक ही लफ्ज़ पर अब उंगलियां की-बोर्ड पर चलने को आतुर हैं...."अफसोस" 

Monday, February 6, 2012

रंगे हाथ धरे गये धर्मनगरी के अवैध शराब व्यवसायी

माँ बमलेश्वरी मंदिर 

होटलों से बरामद शराब

छत्तीसगढ़ की आराध्य देवी माँ बमलेश्वरी के पावन तीर्थ क्षेत्र डोंगरगढ़ में नगर पंचायत द्वारा लिये गये निर्णय अनुसार शहरी क्षेत्र में शराब की बिक्री तथा सेवन पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है किंतु स्थानीय होटलों और ढाबों में ग्राहकों को आसानी से देशी व विदेशी शराब उपलब्ध थी जिस पर कड़ी कार्यवाही करते हुये दबंग एस.डी.ओ. जयप्रकाश मौर्या नें स्थानीय रेल्वे चौक स्थित प्रिंस होटल,दिल्ली होटल,बसेरा होटल,तथा रिन होटल में छापामार कार्यवाही कर भारी मात्रा में शराब के पव्वे बरामद कर प्रतिबंधात्मक कार्यवाही की ।

बरामदगी की कार्यवाही करते एस.डी.एम.


नगरीय क्षेत्र में शराब बैन होने के बावजूद भी उक्त होटलों में शराब खुलेआम पी तथा पिलाई जा रही थी और शौकीनों के लिये देशी-विदेशी ब्रांड की शराब भी अधिक कीमतों में उपलब्ध थी जिसके चलते शहर का नया बस स्टैंड क्षेत्र शराबियों के लिये आरामगाह बन चुका था जहां वो धड़ल्ले से शराब की चुस्कियों के साथ मुर्गे-मटन का लुत्फ उठा रहे थे।प्रशासन का ध्यान कई बार इस दिशा में उठाने के बावजूद भी शराब के इन अवैध व्यवसायियों के विरूद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गयी थी किंतु छत्तीसगढ़ के ही माटी पुत्र तथा तेज़ तर्रार आई.ए.एस.अधिकारी जयप्रकाश मौर्य के नगर में एस.डी.एम. पद पर ज्वाईन करने के साथ ही उनकी आक्रामक कार्यशैली को देखते हुये यह कयास लगाया जा रहा था कि धर्मनगरी के अवैध शराब व्यवसाय पर जल्द अंकुश लगेगा और बीती 6 फरवरी 2012 की रात यह सच भी चरितार्थ हो गया।
सबसे पहले प्रिंस होटल में कार्यवाही की खबर लगते ही अन्य होटल व्यवसायी अपनी-अपनी होटलों में ताला जड़ कर भाग खड़े हुये जिस पर श्री मौर्य नें सागर होटल,रिन होटल और दिल्ली होटल में लगा ताला तोड़वाते हुये होटलों में अवैध रूप से रखी शराब जप्त की। शराब का खुला खेल खेलते इन व्यवसायियों पर की गयी इस कार्यवाही की नगर में सर्वत्र प्रशंसा की गयी और कार्यवाही के दौरान लोगों की भारी भीड़ जमा हो गयी थी।डोंगरगढ़ से सबसे नजदीक की शराब दुकान लगभग 5 कि.मी.दूर ग्राम राका के पास स्थित है जिसको भी हटाने को लेकर हाल में युवा कांग्रेस नेता नवाज खान के नेतृत्व में बड़ा बवाल हो चुका है ।सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण महिलाओं और पुरूषों ने उक्त शराब दुकान पर धावा बोल दिया था जिसके बचाव ने पुलिस वालों ने ग्रामीणों पर जमकर लाठियां भांजी थी । इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी डोंगरगढ़ शहर में ही शराब की उपलब्धता संदेह के दायरे में है ।