Tuesday, November 8, 2011

एक राजकीय पशु की निर्मम हत्या


मृत बॉयसन

हाल में ही एक वयस्क बाघिन की हत्या के मामले में आरोप झेल रहे राजनांदगाँव ज़िले के वन विभाग अमले के माथे अब एक राजकीय पशु वन भैसा (बॉयसन) की निर्मम हत्या का मूक दर्शक बने रहने का आरोप भी मढ़ गया है !बॉयसन की मौत ने एक बार फिर फारेस्ट विभाग के आला अफसरों की नींद काफूर कर दी है और अब वन महकमा कार्यवाही के भय के कारण पूरे प्रकरण को नयी कहानी देने के चक्कर में पड़ गया है !

बॉयसन के हमले से घायल महिला
 ज़िले के अम्बागढ़ चौकी विकास खंड की ग्राम पंचायत हाड़ीटोला के आश्रित ग्राम कहाड़कसा में 7 नवंबर की सुबह खेतों पर काम कर रही कुछ महिलाओं पर एक बॉयसन ने हमला कर दिया जिससे कारण दो महिलायें घायल भी हो गयी ! ग्रामीणों ने घायल गिरिजा बाई और निर्मला बाई को चौकी अस्पताल लाया जहां से उन्हें राजनांदगाँव  रिफर कर दिया गया ! इस घटना के बाद से उत्तेजित ग्रामीणों नें उक्त बॉयसन को लाठियों से पीट-पीट कर मार डाला हालांकि वन विभाग ने वन भैसे की ग्रामीणों द्वारा हत्या किये जाने की बात को सिरे से नकार दिया है तथा उक्त बॉयसन की मौत भूख-प्यास या किसी जहरीले पौधे खाने से होने की आशंका व्यक्त की है ! लेकिन मृत बॉयसन के शरीर पर संघातिक चोटों के निशान साफ तौर पर बयान कर रहे हैं की बॉयसन को बेरहमी से मारा गया है ! वन विभाग के अमले नें मामले को संदिग्ध देखते हुये आनन-फानन में देर शाम चौकी के समीपस्थ वन विभाग की सांगली रोपणी में उसका अंतिम संस्कार कर दिया ! वन विभाग के अमले का यह कृत्य पूरी तरह संदेह के दायरे में हैं वहीं विभाग की निरंतर नाकामियों के चलते लुप्त प्रायः हो रहे दुर्लभ जानवर ग्रामीणों के रोष का शिकार हो रहे हैं ! ग्रामीणों ने बताया की उन्होने वन विभाग को क्षेत्र में एक जंगली बॉयसन की मौजूदगी होने की पूर्व जानकारी दी थी पर विभाग का अमला मूक दर्शक बन कर तमाशा देखता रहा ! पोस्टमार्टम की रपट भी साफ कह रही है की बॉयसन की मौत संदिग्ध अवस्था में हुई है ! अब देखना यह है की प्रदेश के मुखिया डॉ.रमन सिंह जो की राजनांदगाँव के विधायक भी हैं इस पूरे मामले में क्या रूख़ क़ायम करते हैं बहरहाल एक राजकीय पशु की मौत नें फिर एक बार इन बेज़ुबान जानवरों की बदहाली भरी दास्तानों में ईजाफा कर दिया है !!!

7 comments:

  1. यदि इन जानवरों की इसी तरह हत्या होती रही तो जल्द ही हम इनसे महरूम न हो जाएं

    ReplyDelete
  2. सही कहा वरूण जी...छत्तीसगढ़ के राजनांदगाँव ज़िले में हाल में ही एक बाघिन की भी पीट-पीट कर ग्रामीणों ने हत्या कर दी थी जिस पर ख़ूब हंगामा मचा पर नतीजा सिफर रहा...अब एक बॉयसन की मौत कुछ इसी तरह हो गयी है...वन विभाग का अमला हर मामले में नाक़ाम साबित हो रहा है और जानवरों को मार गिराने का कृत धड़ल्ले से जारी है.....

    ReplyDelete
  3. आपकी चितन बिलकुल जायज है, और हो भी क्यों न आखिर हम इंसान जो है, वो इंसान जो शायद दूसरे का दर्द समझते हैं...या समझते थे..
    मुद्दा ये नहीं है की इन सभी लोगों ने जानवरों को मारने का बीड़ा उठा लिया है ,मुद्दा ये है की अपनी सुरक्षा करने का सभी को अधिकार है,,,,,पर दुःख ये है की इसे जानवरों को तो हर कोई बड़ी बहादुरी से मिलकर मार गिरते है है और फिर उस पर जश्न भी मानते है ,,,,पर जो जानवर और वहशी दरिंदा इंसान के रूप में हम सभी के बीच में घूम रहा होता है उसे हम जानकार भी क्यों नहीं सजा देते....अगर वहशी जानवरों को मारने की परंपरा ह तब सभी के साथ एक जैसा व्यवहार होना चाहिए.....
    उस जानवर ने वही काम किया जो उसे करना चहिये ,,क्योकि हम उसकी सीमा के अंदर जाकर एकाधिकार जाता रहे हैं...वो बेचारे कहाँ आकर हमारे बीच हमें मार रहे हैं...पर इंसानी दरिंदे तो हमारे बीच ही हैं...और हमारे बीच की लड़कियों को ही शिकार बनाते हैं..वो भी मासूम बछियों को...क्या ये समाज उन्हें एसी सजा सुना सकता है जैसी इन बेजुबानों को दे रहा है...
    शायद कभी नहीं......

    ReplyDelete
  4. निश्चित ही सटीक टिप्पणी अर्चना जी...दरिन्दों की शक़्ल चाहे जो हो पर वो हमारे बीच में ही क़ायम है....शुक्रिया आपका जो आपने इस संवेदनशील विषय पर अपनी बात रखी.....

    ReplyDelete
  5. उसके जिस्म पर चोट के निशान ना होते तो वे उसे जलाने के बजाये खा भी जाते क्योंकि जो राजकीय है उसे खाने का चलन तो है ही !

    ReplyDelete
  6. हा हा हा हा क्या बात कही अली साहब...बेहतरीन अभिव्यक्ति......शुक्रिया आपका !

    ReplyDelete
  7. इसके अलावा और क्या उम्मीद थी?

    ReplyDelete