Monday, September 26, 2011

आज का अख़बार.....


रोज़ सुबह / सहमें हुये / दरवाज़े पर
दस्तक देता है अख़बार
सतरंगी आवरण / अमानुषी नगर दर्पण
कहीं-कहीं बिखरी हुई लाशें / और कहीं बलात्कार
संपादक् महोदय कहते / विज्ञापनों का 'रेट' चढ़ रहा है
असमायिक मृत्यु का समाचार/नित नये दिन बढ़ रहा है
श्रीमती ढूंढ रही पन्नों में / तरीका नये अचार का
पर दिखायी दे रहा सलीका/चोटों के प्राथमिक उपचार का
झांक रहा कोनें में / समाचार राज्य स्तरीय खेल का
दिया हुआ है विस्तृत विवरण/दुर्घटनाग्रस्त राजधानी मेल का
ग़रीबों के राशन की अफरा-तफरी / नेताओं के मन का खोट
आगरा/दिल्ली/मुंम्बई में फिर हुआ आज विस्फ़ोट
अत्याचार / व्याभिचार / भ्रष्ट्राचार
भर गया ईन्ही ख़बरों से / पूरा आज अख़बार
लिखावट के रंगों पर अगर ध्यान ना दिया जाये तो.....
पढ़ते वक़्त पूरा " लाल " नज़र आता है आज का अख़बार !!!!!!!

Wednesday, September 21, 2011

कुत्ता और कविता........


मेरे घर का कुत्ता कवितायें लिखता है !!!!!!!
लिखता है , तुम आदमी/मैं कुत्ता
हम दोनों में चौपायों की विभिन्नतायें
मगर कितनी समानतायें
मैं मालिक देख कर दुम हिलाता
तू जनता देखकर
मैं खाना देखकर लार गिराता
तू ज़नाना देखकर
मैं काट खाकर चोट पहुंचाता
तू वोट खाकर
मैं लाचार होकर रोता
तू रिटायर होकर
मैं आहट से जाग जाता
तू घबराहट से
कविता के शब्द बढ़ते ही जा रहे थे
आदमी के बदन को कसते ही जा रहे थे
यह देख मैं अचानक चौंका
फिर ज़ोर से भौंका
बंद करो ये शब्दों के अस्त्र
अगर कुत्ते भी कवित्त लिखने लगे तो
आदमी के अस्तित्व और साहित्य के पर्यावरण का
भगवान ही मालिक है !!!!!!!!!!!!