Thursday, June 2, 2011

वो ईक दिन भूखे रहते हैं तो हंगामा हो जाता है..और कोई जब भूख से मरता है तो आवाज़ नहीं आती.....


बात कहने की नहीं ज़ाहिर है कि एयर कंडीशन कारों में घूमने वाले,एयर कूल आरामगाहों में रहनें वाले समाज सेवी बनाम समाज के कर्ता-धर्ता आजकल एक नया शौक पाल रहे हैं जिसका नाम है 'अनशन'... वैसे ये नाम भारतीयों के ज़हन में कोई नया नहीं है...आज से तक़रीबन 95 साल पहले हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी ने यह फार्मूला सुझाया था...जो तब से लेकर आज तक सुपर हिट रहा है...भारत का सबसे बड़ा दुर्भाग्य है कि इस देश में आज़ादी से पहले से लेकर आज तक एक निहायत ही बेतुका क्रेडिट गेम चलता है...आज़ादी से पहले शहीदे आज़म भगत सिंह , सुखदेव , राजगुरू , चन्द्र शेखर आज़ाद जैसे मतवालों ने अंग्रेज़ी हूक़ुमत के शरीर को छलनी-छलनी कर दिया था...वो उनके जज़्बों के आगे टूट चुके थे...गोली का जवाब गोली से देनें वाले वीरों को फाँसी दे दी गयी...और कुछ देश प्रेमी मौन साध कर बैठ गये...कुछ ने फाँसी के विरोध में वही "अनशन" का फार्मुला अपना कर अपने कर्तव्यों की ईतिश्री कर ली और कुछ ने चन्द आँसु बहा कर अपने आप को दिलासा दे दिया....पर देश ने इन महान क्रांतिकारियों को इसी दो मुंहे पन की बदौलत खो दिया...महान शहीद सुखदेव ने अपने एक पत्र में लिखा था कि सच पूछो तो ब्रिटिश सरकार हमें फाँसी नहीं लगा रही है..हमारा गला तो हमारे  सो काल्ड लीडर्स ही दबा रहे हैं...शहीद अशफाक उल्ला ख़ान ने भी जनविरोधी नेताओं के लिये एक गज़ल गायी थी जिसका एक प्रसिद्ध मिसरा था कि 'सुनायें गम की किसको कहानी..हमें तो अपने सता रहे हैं'....
            माफ किजियेगा मैं भी जज़बाती होकर क्या-क्या लिखे जा रहा हूं...पर क्या करूं शहीदे आज़म भगत सिंह का नाम सुनते ही नसों में बहने वाले ख़ून में उबाल आ जाता है और लगता है कि यदि हाथों में कम्प्यूटर की की बोर्ड की जगह तलवार होती तो आज तरक्की के नाम पर हमारे चेहरों पर कालिख़ पोतने वालों की ख़ैर नहीं होती....हाल में ही आम तौर पर राजनितिक पार्टियों से दूरी रखने वाले समाज सेवी श्री अन्ना हज़ारे ने लोकपाल विधेयक के समर्थन में अनशन किया तो ख़्याल आया कि चलो कई दिनों बाद कोई ऐसा मुद्दा सामने आया है जिसे समर्थन दिया जा सकता है...इस देश के युवाओं ने भी हाईटेक केम्पेन चला कर हज़ारे जी को पूर्ण समर्थन दिया....सरकार ने भी दबाव में आकर विधेयक को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दे दी...लेकिन फिर वही हुआ जो इस देश में अमूमन अब तक होता आया है..श्री अन्ना हज़ारे द्वारा प्रतावित लोकपाल कमेटी के सदस्यों की भ्रष्ट्राचार में लिप्त होने की ख़बरे मिडिया में आयीं और अन्ना जी के इस अथक प्रयास की मट्टी-पलीद हो गयी....और अब 4 जून से भारत के योग गूरू बाबा रामदेव भी अनशन के इसी सुपर हिट फार्मुले पर हाथ अज़माने उतर रहे हैं...हज़ारे जी तो सादगी पसन्द आदमी है लिहाज़ा उनका अनशन बेहद सादगी के साथ चला और एक हद तक सफल भी रहा पर स्कॉटलैंड में एक आलीशान द्वीप के मालिक बाबा रामदेव अपने लाव-लश्कर के साथ 2.5 लाख वर्ग फीट के आलीशान पंडाल में 1000 वर्ग फीट के एयर कंडीशन टेंट में अस्पताल और सी.सी.टी.वी. जैसी सम्पूर्ण सुविधाओं के साथ अनशन में बैठेंगे....बाबा रामदेव का कहना है कि उनका अनशन बनाम आंदोलन सत्ता के लिये नहीं वरन व्यवस्था परिवर्तन के लिये है...खैर जो भी हो हाल में ही छत्तीसगढ़ के धर्मजयगढ़ ईलाके के एक परिवार जिसमें माता और पिता,एक मासूम को मिलाकर तीन लोगों ने भूख से तड़प कर अपनी जान गवाँ दी...पर इस पूरे मामले को लीपा-पोती कर दबा दिया गया..कहीं किसी को कोई ख़बर नहीं पहुंचने दी गयी....आम जनता की छाती पर बैठ कर विलासिता का जीवन जी रहे बड़े लोग जब किसी मुद्दे को लेकर एक दिन भी भूखे रहते हैं तो हंगामा मच जाता है...और उधर कोई जब भूख से मरता है तो आवाज़ तक नहीं आती....आख़िर कब तक चलेगा यह सब...कब तक.......!!!!