Thursday, May 26, 2011

ख़ुशियों से लबरेज़ लम्हों में दर्द के अफसाने भी हैं....


कहा जाता है कि खुशी अकसर दर्द की हदों से ग़ुज़र कर आती है..या गोया ये कह लिजिये की दर्द के सिलसिले जहाँ ख़त्म होते हैं उसी जगह से ख़ुशी की शुरुवात होती है...मेरी शरीक़े हयात राजनांदगाँव ज़िले की डोंगरगढ़ तहसील स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में कार्यरत है...डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध धर्म नगरी के रूप में विख्यात है लिहाज़ा वहाँ काफ़ी लोगों का आना-जाना होता है...अब अस्पताल है तो मरीज़ भी बहुतायत आयेंगे....एक दिन काम से लौट कर उसने एक वाकया बताया जो इस पोस्ट की शक़्ल में आपके सामने है.... डोंगरगढ़ का अस्पताल अपेक्षाकृत काफी छोटा है...अस्पताल का डिलीवरी रूम भी इसी मर्ज़ का शिकार है...छत्तीसगढ़ के अन्दरूनी ईलाको में पहले से ही स्वास्थ्य कर्मचारियों का टोटा है जिसके चलते ज़ियादातर प्रसव अस्पतालों में एक के बाद एक ही किया जाता है...
पर उस दिन डोंगरगढ़ के अस्पताल में प्रसव वेदना से तड़पती दो महिलाओं को एक साथ लाया गया था...दोनों महिलाओं के परिजन जल्द ही नये मेहमानों को देखने के लिये व्याकुल हुये जा रहे थे...मेरी श्रीमती अस्पताल के अपने बने चेम्बर में खाली बैठी थी कि नर्स ने उससे कहा "भारती खाली हो तो ज़रा डिलीवरी रूम में चलो..थोड़ी मदद कर दो" यह सुन वह डिलीवरी रूम की तरफ रवाना हो गयी...दरवाज़े पर ही दोनों महिलाओं के परिजनों ने उम्मीद भरी नज़रों से उसे देखा...अन्दर दोनों महिलाओं की पीड़ा अपने चरम पर थी और अस्पताल के डॉक्टर व अन्य स्टॉफ डिलीवरी की अंतिम प्रक्रिया पूर्ण करने की तैय्यारी में जुटे थे...तभी डॉ.साहब ने मेरी श्रीमती को किसी ज़रूरी चीज़ स्टोर रूम से लाने को कहा...बाहर निकलते ही महिलाओं के परिजनों नें उससे पूछा क्या हुआ...? उसने उन्हें धीरज रखने की बात कही और वह स्टोर रूम की ओर रवाना हो गयी...वापसी में उन्हीं में से एक परिजन ने उससे कहा कि "हम 8 सालों से इस पल का ईंतेज़ार कर रहे हैं भगवान ने अब जाकर यह् खुशी दी है..ज़रा ध्यान रखना"...तभी दूसरी महिला के परिजन नें कहा कि "पहली औलाद है हमारे खानदान की..बड़ी बैचैनी लग रही है"...उसने अपनी ओर से दोनों महिलाओं को ढाढस बंधाया और भीतर चली गयी....कहते हैं कि जन्म और मृत्यु ईश्वर के हाथ है...उन दोनों महिलाओं में से एक को एक स्वस्थ्य बालक हुआ तो दूसरी को जन्म से ही एक मृत बालक हुआ...नर्स ने बाहर जाकर उनके परिजनों को यह बात बता भी दी...काम पूर्ण होने के बाद जब मेरी श्रीमती बाहर निकली तो उसने देखा कि डिलीवरी रूम के एक कोनें पर एक परिवार खुशी मना रहा था तो दूसरे कोनें पर बैठे परिवार के लोगों के आँसू नहीं थम रहे थे..वह भावनाओं के विरोधाभास में उलझी हुई वापस घर आ गयी...उसे शायद उस समय यह समझ नहीं आया कि वो किसे जाकर मुबारकबाद दे और किसकी आँखों से अविरल बहते आँसू पोछे...ज़िन्दगी कभी-कभी ईंसान को असमंजस के ऐसे ही मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है जहाँ वह निस्तब्ध होकर प्रकृति का तमाशा देखने के लिये मजबूर हो जाता है..एक को पीड़ा के बाद प्रतिसाद मिला तो दूसरे को प्रतिघात...पर ज़िन्दगी तो ज़िन्दगी है यूं ही बदस्तूर चलती रहेगी...सच है कि ख़ुशियों से लबरेज़ लम्हों में दर्द के अफसाने भी हैं....

5 comments:

  1. इसी का नाम जिंदगी है

    कहीं धूप तो कहीं छाव

    कहीं खुशी तो कहीं गम

    घटनाक्रम का बेहतरीन तरीके स‍े चित्रण

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  2. दुनिया की लगभग सात अरब आबादी में इस तरह के संयोग अस्वाभाविक नहीं हैं ! मेरे ख्याल से सबके अपने अपने सुख दुःख !

    एक सवाल ये कि , मृत शिशु अगर 'बालक' होने के बजाये 'बालिका' होता तो ? ...क्या परिजन तब भी इतने ही दुखी होते ?

    संभावनायें कुछ भी / कुछ और भी हो सकती हैं ! बहरहाल अपने लोग, अपने अहसास , अपनी सांसों पे बात खत्मशुद !

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  3. शोएब जी अक्टूबर के बाद आपकी कोई पोस्ट नहीं पढ सका था इसके लिए माफी.....आपस में मिल बैठ के मामला सुलटा लेंगे
    वैसे आपकी सारी पोस्ट मैनें अब पढ ली है और सारी पोस्टों के कमेंट यहाँ पर
    "बस कि दुश्वार है हर काम का आसां होना
    आदमी को भी मुयस्सर नहीं,इंसा होना"
    "हवस को है नशाते-कार क्या क्या
    न हो मरना तो जीने का मजा क्या"
    "जान दी,दी हुई उसी की थी
    हक तो यह है,कि हक अदा न हुआ
    तो फीक बअन्दाज़-ए-हिम्मत है अज़ल से
    आंखो में है वो कतरा,कि गोहर न हुआ"

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  4. क्या बात है राणा साहब...आपने तो एक ही ग़ज़ल से सारे गिले-शिक़वे मिटा दिये....शुक्रिया आपका भले देर से ही सही मगर आपका दीदार तो हुआ....

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  5. तहे दिल से आपका शुक्रिया अता करते हैं शोएब भाई जो आपने हमें पढने की फुरसत निकाली ,रही बात दीदार की तो......
    "तेरे चेहरे पर कोई गम नही देखा जाता
    हमसे उतरा हुआ परचम नही देखा जाता
    वो हमें जब भी बुलाएगा चले जाएंगे
    उससे मिलना हो तो मौसम नहीं देखा जाता"
    07869838311

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