Monday, April 18, 2011

शीशा हो या दिल हो आख़िर....टूट जाता है..


पढ़ने ये लाईनें महज़ फिल्मी नज़र आती है जिसके लिखे जाने के बाद शायर को मुँह मांगे दाम सौंप दिये जाते हैं उसके बाद बाक़ी का मसला फिल्मकार पर छोड़ दिया जाता है कि वह चाहे तो गाने को यादग़ार बना दे या फिर उसकी मटियापलीद कर दे ! पर लिखने वाले भी क्या ख़ूब होते हैं...कभी-कभी गानों की शक़्ल में ज़िन्दगी का गुज़र रहा हर लम्हा आपके सामने आ खड़ा होता है और हम यह सोचने को मजबूर हो जाते हैं कि मानों लगता है कि हमारी हक़ीक़त देख कर ही गीतकार ने लिखने की सोची होगी...! खैर जो भी हो आख़िरकार ऊन नज़्मों को रचने वाला है तो आदमज़ात...भला वो ज़िन्दगी के पहलुओं से क्यों वाबस्ता ना रहेगा...?? बहरहाल पोस्ट का मजमुआँ कुछ यूं है कि नये ज़मानें में मोहब्बत (लड़के-लड़कियों की) कितनी ख़तरनाक साबित हो रही है?? यक़ीनन अब वो ज़माना नहीं रहा जब प्रेमिका के विछोह में प्रेमी मारा-मारा फिरता था...मिलन और जुदाई के अफ़साने गाकर अपने आप को बहला लेता था..आज की हक़ीक़त निहायत ही ख़तरनाक है...आज के दौर का प्रेमी प्रेमिका के रूठने पर उसे मनाने के एक-आध कोशिश के बाद उसके मासूम चेहरे पर तेज़ाब फेंकनें की औक़ात रखता है...प्रेमिका के परिवार की रज़ामन्दी ना मिलने पर उनका क़त्ल तक कर देने का माद्दा रखता है...गोया यूं कह लिजिये की किसी को पाने की चाहत में हर नागवार कारनामों को अंजाम देने का हौसला रखता है....
हमारें संस्कार धानी कहे जानें वाले शहर में हालिया एक क़त्ल हुआ जहाँ लड़की के बालिग़-नाबालिग़ भाईयों ने ही मिलकर एक 18 वर्षीय नवयुवक को बड़ी बेरहमी से निपटा दिया...सुबह तक़रीबन 5 बजे लड़की ने ख़ुद फोन कर उसे शहर की चौपाटी पर मिलने बुलाया...सुबह-सवेरे अपनी बहन को बन-ठन कर बाहर निकलते देख भाईयों का शक़ पुख़्ता हुआ..लिहाज़ा वो उसका पीछा करते-करते चौपाटी तक पहुँच गये...दोनों को साथ में देखकर उनके ग़ुस्से ने आग़ की शक़्ल अख़्तियार कर ली...लड़का जान बचाने की नीयत से बग़ल के ही एक फॉरेस्ट डिपो में भाग आया...जहाँ पड़ी लकड़ियों से ही लड़की के भाईयों ने उसे इतना पीटा की बेचारे की जान शरीर से काफूर हो गयी...पेशे से पत्रकार हूँ लिहाज़ा बिलावजह मारी गयी लाशें देखने का ख़ासा अनुभव है पर उस मासूम की लाश देखी तो मन से एक गहरी आह निकल आयी जिसकी अनुगूंज अल्फ़ाज़ बन कर आपके सामनें है...छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर का एक क़िस्सा तो निहायत ही शर्मनाक है..बार-बार मशक्कत करने के बाद भी जब एक लड़की ने प्रेम संबंधों के लिये हामी ना भरी तो लड़के ने अपनें दोस्तों के साथ मिलकर उसे रास्ते से उठा लिया और एक मारूति वैन में सामूहिक रूप से उसके साथ मुहँ काला करते हुए रास्ते की एक सुनसान जगह के एक पेड़ पर फाँसी लगा दी...यक़ीनन दिल दहल जाता है ऐसी दास्तानें सुन कर...इसे आप मोहब्बत हरगिज़ नहीं कह सकते..ये तो सीधा-सीधा वहशीपन है जिसे मोहब्बत की चाशनी में जबरिया लपेटा जा रहा है..पहले-पहल दिल के टूटनें पर दर्द होता था अब दहशत होती है...कहा जाता है कि मोहब्बत में अकसर दिल टूट जाते हैं पर आज के दौर की मोहब्बत में यह टूटन भारी साबित हो रही है...!!!

6 comments:

  1. ऐसी मानसिंकता के लोगों के कारण ही मुहब्‍बत बदनाम है।
    अच्‍छा लिखा है आपने।
    शुभकामनाएं....;

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  2. पहला प्रकरण युवती के परिजनों के 'अस्वीकृति जन्य व्यवहार' से सम्बंधित है अतः इस मसले में प्रेमी युगल की पारस्परिक बेवफाई नहीं देखी जानी चाहिए ! सामाजिक कारणों से उन दोनों में से एक ने अपना बेशकीमती जीवन खोया और दूसरे ने अपना पसंदीदा जीवन साथी ! फिलहाल प्रणय संबंधों की ऐसी परिणतियों के लिए समाजगत असहिष्णुता को दोषी माना जाये !

    दूसरा प्रकरण एकतरफा प्रेम को नकार दिए जाने के बाद किया गया खांटी / जघन्य अपराध है जिसमें लड़की का कोई कुसूर ना था सो इसकी सज़ा हौलनाक होनी चाहिए !

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  3. वाह अली साहब आपनें तो पूरे मामलें में निर्णायक की भुमिका निभा दी..कमाल करते हैं आप भी..

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  4. समय बदला है और उसीके साथ लोगों का व्यहार भी बदला है,तनाव भी बढा है और दिखवा भी और उसी के साथ साथ गुस्सा भी,सब कुछ एकाएक नही हो रहा है धीरे धीरे नौबत यंहा तक़ आ गई है,आगे राम जाने क्या होगा।वैसे ज़माने की हक़ीक़त बेबाकी से बयां की आपने,बधाई आपको।

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  5. प्रेम का यह रूप नहीं है इसे आप कुछ और नाम दे सकते है प्रेम में इस तरह की घिनौनी हरकत हो ही नहीं सकती |

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  6. प्रेम तो समर्पण का नाम है ..लेकिन यहाँ पर लड़की का कसूर शायद नहीं था ..लेकिन उसके भाइयों द्वारा उस लड़के को पीटा जाना यह सही नहीं है ..कम से कम कोई सही निर्णय तो लिया जाना चाहिए था न और उसके बाद फिर कुछ किया जाना चाहिए था ..लेकिन किसी भी कीमत पर अगर व्यक्ति की जान पर बन आती है तो यह कहाँ की इंसानियत है ....और कहाँ का प्रेम और किस तरह का प्रेम समझ नहीं आता ...आपने बहुत सटीकता से इस पर प्रकाश डाला है ....आपका आभार

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